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लाल बहादुर शास्त्री डेथ मिस्ट्री : इस फिल्म से पता चलता सच लेकिन …….

लाल बहादुर शास्त्री डेथ मिस्ट्री : देश के दूसरे राष्ट्रपति लाल बहादुर शास्त्री के बारे में तकरीबन हर भारतीय को पता है. लाहौर तक भारतीय सेना को पहुंचवाकर माँ भारती का यश एवं गौरव बढ़ाने वाले भारत रत्न राष्ट्रिय नेता की कमी आज भी देश को खलती है.

उनकी मौत आज भी पहेली के तौर पर देखी जाती है. यदि आपने यह फिल्म देख ली तो आपके अंदर का भयानक भ्रम दूर हो जायेगा कि शास्त्री जी की मौत हुई थी क्योंकि वास्तव में वह एक पॉलिटिकल साज़िश थी.

सत्ता में बैठने में असमर्थ कुछ बौने नाकारा लोगों को तब लाल बहादुर शास्त्री जी से इतनी जलन या कहे कि नफरत होने लगी थी कि उन्हें अपने रास्ते से हटवाने के लिए उन्हें ज़हर देकर मरवा दिया गया और इतनी घोर बर्बरता का दृश्य देखने को मिला कि आप शायद यकीन भी न कर पाएं. परिवार से लेकर बुद्धिजीवी वर्ग तक के कहने के बावजूद उनके उस समय पार्थिव शरीर का तत्कालीन पोस्टमॉर्टेम नहीं किया गया.

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2009 में इसको सूचना के अधिकार माध्यम से जब शास्त्री जी की मौत से जुड़े हुए कागज़ात का विवरण माँगा गया तो फिर उस समय की कांग्रेस सरकार की तरफ से कहा गया कि सोवियत संघ में उनका पोस्टमॉर्टेम हुआ ही नहीं था और न ही इससे मृत्यु से जुड़े कोई दस्तावेज़ उसके पास संगृहीत है.

अब इससे दुखद विडम्बना क्या हो सकती है कि एक शांति वार्ता करने ताशकंत, सोवियत संघ (अब उज़्बेकिस्तान देश) गए शास्त्री जी को देश का इतना बड़ा तिरस्कार मिलेगा और उनके ही हत्यारो को महिमंडित कर सत्ता की चलाने को दे दी जाएगी.

अब दौर बदल चुका है, क्योंकि देश में एक आंशिक रूप से ही सही राष्ट्रवादी और कांग्रेस विरोधी सरकार है जो लाल बहादुर शास्त्री की हत्या की साज़िश को उजागर करने वाली फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित फिल्म “ताशकंत फाइल्स” को रिलीज़ होने दिया डिजिटल एवं बड़े परदे यानी थिएटर्स में.

हालाँकि यह फिल्म देश में तो लोगों को लाल बहादुर शास्त्री की मौत से जुड़ी सच्ची बताने में कामयाब रही किन्तु यह फिल्म पूरी दुनिया को लाल बहादुर शास्त्री जो की पद पर कार्यत प्रधानमंत्री थे, उनकी हत्या से अवगत करवाती लेकिन इंडियन ऑस्कर जूरी में मौजूद देश विरोधी और लेफ्ट-लिबरल अपर्णा सेन ने आखिरकार इस फिल्म को फाइनल होने ही नहीं दिया और इसकी जगह एक बकवास कमर्शियल मूवी गली बॉय को नामांकित करवा दिया जिसका हशल यह हुआ कि यह कुछ ही दिनों में ऑस्कर की रेस से बाहर हो गई.

देश में सत्ता बदली है लेकिन व्यवस्था अभी भी देश-विरोधी बनी हुई. जिसका केवल एक ही इलाज देश परास्त ताकतों को आवाज एवं समर्थन के ज़रिये मज़बूत करना. देखिये और दूसरों को भी ताशकंत फाइल्स ज़रूर दिखवाइये ताकि आप जान सके कि लाल बहादुर शास्त्री मरे नहीं बल्कि उन्हें मरवाया गया था!

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